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पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¤•ांतवास का कà¥à¤¯à¤¾ अरà¥à¤¥ है?
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद कà¥à¤› शà¥à¤°à¥‚आती दिनों के लिठनई माठऔर उसके नवजात शिशॠको घर के अनà¥à¤¦à¤° ही रखने की परंपरा रही है।
माठऔर नवजात शिशॠको संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाने और नई माठको शिशॠके जनà¥à¤® की थकावट से उबारने के लिठयह परंपरा शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆà¥¤
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के बाद à¤à¤•ांतवास अवधि की अलग-अलग परंपराà¤à¤‚ व पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤à¤‚ हैं। मगर, सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ यह माना जाता है कि नई माठको इस दौरान अधिक से अधिक आराम करना चाहिठऔर घर का काम-काज कम से कम करना चाहिà¤à¥¤
अकà¥à¤¸à¤°, à¤à¤• माठà¤à¤•ांतवास अवधि का पालन तà¤à¥€ कर सकती है, जब उसे परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का सहयोग हासिल हो। संयà¥à¤•à¥à¤¤ परिवारों में रहने वाली माà¤à¤“ं या फिर अपने माता-पिता के घर जाकर डिलीवरी कराने वाली माà¤à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पारंपरिक à¤à¤•ांतवास पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं का पालन करने की अधिक संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है। कई नई माà¤à¤‚ इस दौरान मालिश के लिठमालिशवाली या घर के काम में मदद करने के लिठकामवाली या दाई को रख लेती हैं।
पारंपरिक तौर पर, à¤à¤• नई माठके लिà¤, à¤à¤•ांतवास की अवधि में कई पाबंदियां होती हैं। शिशॠके जनà¥à¤® की थकान से उबरने के लिठकà¥à¤¯à¤¾ अचà¥à¤›à¤¾ है और कà¥à¤¯à¤¾ नहीं, ये पाबंदियां इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं पर आधारित हैं। यदि आपको इनमें से कà¥à¤› पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚धो का पालन करने में कठिनाई हो रही है, तो अपने परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से बात करें।
चिंता या तनाव आपके दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है, साथ ही आपकी सेहत पर à¤à¥€ इसका बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ सकता है। विशेषकर, यदि आप पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद के अवसाद से पीड़ित हैं, तो हो सकता अतà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध आपको और निराश कर दें।
पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के बाद à¤à¤•ांतवास की अवधि कितनी लंबी होती है?
à¤à¤•ांतवास की अवधि अलग-अलग कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अलग-अलग होती है। उतà¥à¤¤à¤°à¥€, पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में, महिलाà¤à¤‚ शिशॠके जनà¥à¤® के बाद लगà¤à¤— 40 दिनों तक घर में ही रहती हैं। पूरà¥à¤µ में, खासतौर से पूरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में, à¤à¤•ांतवास की धारणा पर दृà¥à¤¤à¤¾ से अमल नहीं किया जाता। यहां यह अवधि काफी छोटी होती है। दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कà¥à¤› कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में यह अवधि 60 दिन तक à¤à¥€ होती है।
हालांकि, काफी नई मांà¤à¤‚ पारंपरिक à¤à¤•ांतवास का पालन नहीं करती। शायद इसलिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वापस अपनी नौकरी पर जाना होता है या फिर उनके पास जरà¥à¤°à¥€ सहयोग नहीं है। कà¥à¤› माताà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¤•ांतवास की इस धारणा को पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ जमाने की बात मानती हैं।
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ कà¥à¤› सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ आप कैसे गà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¨à¤¾ चाहती हैं, यह पूरी तरह आप पर, आपके परिवार पर और आपकी मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं पर निरà¥à¤à¤° करता है।
कà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¾à¤‚त 40 दिन से पहले बाहर जाने से मà¥à¤à¥‡ या शिशॠको संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है?
à¤à¤¸à¤¾ जरà¥à¤°à¥€ नहीं है। कई माà¤à¤à¤‚ अपने नवजात शिशà¥à¤“ं के साथ 40 दिन की à¤à¤•ांतवास अवधि पूरी होने से पहले घर से बाहर जाती हैं, और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ (इनफेकà¥à¤¶à¤¨) नहीं होता।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक घर पर रहने से संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की चपेट में आने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कà¥à¤› हद तक कम हो सकती है। चाहे आप à¤à¤•ांतवास का पालन न कर रही हों, तो à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में आपको आराम करने की ही सलाह देते हैं। आपके शरीर को ठीक होने के लिठसमय चाहिठहोता है, खासकर आपका सिजेरियन ऑपरेशन हà¥à¤† है तो।
अगर, आप और आपका शिशà¥, दोनों सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हों और डॉकà¥à¤Ÿà¤° की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ हो, तो संà¤à¤µ है कि आप 40 दिन पूरे होने से पहले à¤à¥€ बाहर जा सकें। वासà¥à¤¤à¤µ में, ताजी हवा और बदला हà¥à¤† परिवेश आप दोनों के लिठफायदेमंद हो सकता है।
मगर, बाहर आपको सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ जरà¥à¤°à¥€ à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤ बरतने होंगे, ताकि संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से बचाव हो सके।
पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के बाद à¤à¤•ांतवास की अवधि में सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
नई माठकी मालिश
à¤à¤•ांतवास के दौरान दिन में à¤à¤• बार नई माठके पूरे शरीर की मालिश की जाती है। इससे आपके थके हà¥à¤ शरीर को काफी आराम मिलेगा। यह आपके रकà¥à¤¤à¤¸à¤‚चार में à¤à¥€ मदद करता है। और अधिक पढ़ें कि मालिश के लिठकौन-कौन से तेल बेहतर मानें जाते हैं?
अगर आपका सीजेरियन ऑपरेशन हà¥à¤† है, तो यहां पढ़ें कि किस तरह ऑपरेशन के बाद सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ मालिश कराई जा सकती है।
शिशॠकी मालिश
कई माताà¤à¤‚ अपने शिशà¥à¤“ं की रोजाना मालिश करती हैं। कई परिवारों में, शिशॠकी मालिश उसके नहलाने की दिनचरà¥à¤¯à¤¾ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बन जाता है। यह à¤à¤•ांतवास की अवधि के बाद à¤à¥€ जारी रहता है। अगर आप अपने शिशॠकी मालिश नहीं कर रही हैं, तो यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि जो à¤à¥€ मालिश कर रहा है, कोमलतापूरà¥à¤µà¤• और सही तरीके से कर रहा है।
अगर आपने मालिश के लिठकिसी अनà¥à¤à¤µà¥€ दाई या जापा बाई को रखा है, तो उस पर à¤à¥€ हमेशा नजर रखें। अकà¥à¤¸à¤° असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¥‡ नवजात शिशà¥à¤“ं को देखा गया है, जिनकी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जोड़ कड़क मालिश की वजह से खिसक गठहैं। यहां पà¥à¥‡à¤‚ की अपने शिशॠकी मालिश के लिठकौन से तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाà¤à¥¤
à¤à¤•ांतवास के दौरान आहार
यह माना जाता है कि à¤à¤•ांतवास के समय व नई माठकी सेहत में सà¥à¤§à¤¾à¤° का सीधा संबंध उसके खान-पान से है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के हर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कोई न कोई à¤à¤•ांतवास का पसंदीदा वà¥à¤¯à¤‚जन है, जो नई माठको दिया जाता है ।
आमतौर पर यह माना जाता है की पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के बाद नई माठके शरीर के “संतà¥à¤²à¤¨â€ में बदलाव आता है और वह खून बह जाने के कारण "ठंडी अवसà¥à¤¥à¤¾" में चला जाता है। इसलिठà¤à¤•ांतवास का à¤à¥‹à¤œà¤¨ अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤¸à¥€ सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बनाया जाता है, जो गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ देने वाली मानी जाती हैं। माना जाता है की यह गरà¥à¤® खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ माठको शिशॠके जनà¥à¤® के बाद जलà¥à¤¦ ठीक होने में मदद करते हैं।
यहां कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की सूची दी गई, जिनके सेवन करने या न करने की सलाह आपको दी जा सकती है, जैसेः
लौकी और तोरी दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठअचà¥à¤›à¥‡ माने जाते हैं।
माना जाता है कि हर à¤à¥‹à¤œà¤¨ के बाद पान खाना, पाचन में मदद करता है।
यह समà¤à¤¾ जाता है कि घी का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन शरीर की शकà¥à¤¤à¤¿ वापस पाने और मांसपेशियों को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करता है।
फल, फलों का रस और सोडा यà¥à¤•à¥à¤¤ पेय पदारà¥à¤¥ मना होते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वह ठंडे माने जाते हैं।
हरी और लाल मिरà¥à¤š पचाने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकती है, इसलिठउनकी जगह काली मिरà¥à¤š का सेवन करने के लिठकहा जा सकता है।
"वातीय" खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, फूलगोà¤à¥€, पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ और कटहल आपके दूध के जरिये शिशॠके पेट में गैस बना सकते हैं। इसलिठइनका सेवन न करने के लिठकहा जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ आप à¤à¤•ांतवास के लिठवà¥à¤¯à¤‚जन विधियां तलाश रही हैं? हमारे पारंपरिक à¤à¤•ांतवास के à¤à¥‹à¤œà¤¨ और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करा रही माताओं के लिठपेय के बारे में यह लेख पà¥à¥‡à¤‚ ।
à¤à¤•ांतवास के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध
जब आप पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद घर लौटेंगी तब à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ हो सकता है कि आपको अपनी सà¤à¥€ रोजमरà¥à¤°à¤¾ की आदतें बदलनी पड़ेंगी। ख़ास तौर पर तब, जब आप संयà¥à¤•à¥à¤¤ परिवार में या अपने माता-पिता के साथ रह रहीं हैं। आप कैसे सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करती हैं से लेकर कà¥à¤¯à¤¾ कपड़े पहनती हैं तक सब कà¥à¤› के लिठनठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ हो सकते हैं।
हरेक परिवार और कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤à¤‚ अलग-अलग हो सकती हैं। माना जाता है की à¤à¤•ांतवास के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚धों का पालन करने से माठको आगे जीवन में गठिया, सिरदरà¥à¤¦, शरीर में दरà¥à¤¦ जैसी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से बचने में मदद मिलती है। हालांकि, इन सब मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं को साबित करने के लिठकोई चिकितà¥à¤¸à¤•ीय पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ उपलबà¥à¤§ नहीं है।
à¤à¤•ांतवास में आपको जो à¤à¥€ करने या न करने की सलाह दी जाती है, वह इसी विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ पर आधारित होती है कि गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ से आपकी सेहत में जलà¥à¤¦à¥€ सà¥à¤§à¤¾à¤° होगा। आपको हर समय अपने आप को गरà¥à¤® अवसà¥à¤¥à¤¾ में रखने की सलाह दी जाà¤à¤—ी, à¤à¤²à¥‡ ही आपने शिशॠको गरà¥à¤®à¥€ के चिलचिलाते मौसम में जनà¥à¤® दिया हो!
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